Iqra Patilमैं उसी खेत,खलिहान और गॉंव की मिट्टीसे आती हूँ जिससे मैं आखरी दम तक जुडी रहुँगी। मैं इक़रा पाटील, महाराष्ट्र के तोळनूर गाँव के किसान की बेटी जो शेहर मे आकर केमिस्ट्री में मास्टर्स करती है ! जब नाटक के साथ केमिस्ट्री जुड़ गई तब हर किसकी सँवेदना को जीन कि क्षमता मुझमें आयी । नाटक, में साहित्य से लेकर सँगीत तक सारी कलाएँ शामिल हैं । ' पद्य ' साहित्य में मेरी रुची बढ़ती गयी । कुछ सुझा, कुछ लिखा और कुछ जमा हुवा । शायरी पढ़नेवाली मैं लिखनेवाली बन गयी। मेरा लिखा हुवा कोई सुनने भी लगा । मेरी भावनाएँ शब्दोंसे सहजतासे काग़ज़ पर उतरती रही। बहोत सारी कविताएँ काग़ज़ पर उतरी नही, बहोत सारी लिखी हुई कविताओंसे फिर मुलकात ना हो पायी । जो बची रही उनको उनके वाचकों तक पहुँचाने कि ये कोशीश । Read More Read Less
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