"9788194484523" Ramrajya परसदध फलम अà¤à¤¨à¤¤ आशतष रन क यह पसतक मरयद परषततम शररम क जवन-दरशन पर आधरत ह। उनहन अपन वशषट लखन शल म उन परसग क वयखय क ह ज आमजन क मसतषक म उमडत-घमडत रह ह। पसतक इतन रचक ह क à¤à¤• बर पढन पररठकर दन क बद बच म रकन लगà¤à¤— असà¤à¤µ ह। "9789352669820" Maun Muskaan Ki Maar मन और अधक उतसह स बलन शर कय, ‘‘à¤à¤ˆà¤¸à¤¹à¤¬, म य मर जस इस कषतर क पचचस-तस हजर लग लमचद स परम करत ह, उनक ललबतत स नह।’’ मर बत सनकर उनक चहर पर à¤à¤• ववशत à¤à¤° मसकरहट आई, व बहत धम सवर म बल, ‘‘पललन (पररण) क समपत ह पलतलन (परतरण) ह।’’ म आशचरयचकत थ, लमचद पन ‘र’ क ‘ल’ बलन लग थ। इस अपरतयशत परवरतन क दखकर म दग रह गय। व अब बढ ठदखन लग थ। बल, ‘‘इनसन क इचछ पलत (परत) हन ह सवलग (सवरग) ह, औल उसक इचछ क पल (पर) न हन नलक (नरक)। सवलग-नलक मलन (मरन) क बद नह, जत ज ह मलत ह।’’ मन पछ, ‘‘फर दशà¤à¤•त कय ह?’’ अर à¤à¤¯! जर सशल मडय पर आà¤, लइक-डसलइक (like-dislike) ठक, समरथन, वरध कर, थड गलगपतर कर, आदलन क हसस बन, अपन रषटरपरम क सबत द। तब दशà¤à¤•त कहलà¤à¤—।